बढ़ते बाघ की एक झलक

कहा जाता है कि एक समय में World में जितने Tiger थे, इस वक्त उसके 5% ही रह गए हैं। ऐसे समय में, जब World  में बाघों की संख्या लगातार कम हो रही है, अपने देश में उनकी तादाद का बढ़ना एक सुखद समाचार है।

सोमवार को World Tiger Day पर PM Narendra Modi ने बाघगणना के जो ताजा आंकडे़ जारी किए, वे आश्चर्य में डालने वाले तो हैं ही, साथ ही बाघों के संरक्षण को लेकर देश में किए जा रहे प्रयासों पर उम्मीद भी बंधाते हैं। साल 2014 में हुई पिछली बाघगणना के समय देश में बाघों की संख्या 2,226 आंकी गई थी, जो इस बार बढ़कर 2,967 हो गई है, यानी इस बार करीब एक तिहाई की बढ़ोतरी देखने को मिली है।

संख्या बढ़ने की यह उम्मीद बाघगणना शुरू होते समय ही थी, क्योंकि पहले इंतजाम ठीक से न होने पाने के कारण पूर्वोत्तर के राज्यों की बाघगणना नहीं मिल पाती थी, पर इस बार इसके इंतजाम ठीक से किए गए। हालांकि देश में बाघों की संख्या बढ़ने का यह अकेला कारण नहीं है। अगर छत्तीसगढ़ और मिजोरम को छोड़ दिया जाए, तो देश के तकरीबन सभी हिस्सों में बाघों की संख्या काफी बढ़ी है। खासकर MP, Karnataka और Uttarakhand में। संतोष की बात यह भी है कि बाघों की संख्या बढ़ने का यह सिलसिला विगत एक दशक से जारी है, 2006 की बाघगणना में उनकी संख्या 1,411 पाई गई थी।

दुनिया भर में बाघों की संख्या घटने के जो भी कारण हैं, वे सभी भारत में मौजूद हैं। आमतौर पर इसके दो बड़े कारण माने जाते हैं। एक तो है उन जंगलों का लगातार कटते जाना, उनका आकार घटते जाना, जो बाघों के प्राकृतिक आवास हैं और दूसरा, बाघों का अवैध कारोबार और उसकी वजह से होने वाला उनका शिकार।

माना जाता है कि पिछले कुछ समय में वन विभाग काफी सक्रिय हुआ है और अवैध कारोबार व शिकार पर सख्ती बरतने से ये नतीजे हासिल हो सके हैं। हालांकि बाघ के प्राकृतिक आवास क्षेत्रों के लगातार कम होते जाने की समस्या अभी भी बनी हुई है। तमाम रिपोर्टें यही बताती हैं कि बाघों के लिए देश में जो संरक्षित वन हैं, उनमें मानव आबादी भी बढ़ रही है और मानव आबादी की वैध व अवैध दखल भी।

अभी कुछ समय पहले जब बाघ को केदारनाथ के पास वन में 12 हजार फुट की ऊंचाई पर देखा गया, तो विशेषज्ञों ने यह अनुमान लगाया था कि बाघ अब शायद अपने लिए नया प्राकृतिक आवास खोज रहे हैं। इसके पहले तक बाघ को इतनी ऊंचाई पर विचरण करते कभी नहीं देखा गया था। जाहिर है कि अगर इन स्थितियों के बीच भी देश में बाघों की संख्या बढ़ रही है, तो यह संरक्षण कार्यक्रमों की एक बड़ी सफलता है।

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