कुछ ऐसा था सुषमा स्वराज का राजनीतिक जीवन

BJP की नेता Sushma Swaraj का 67 साल की उम्र में Delhi के AIIMS Hospital में देहावसान हो गया। उनके निधन से पूरे देश में शोक की लहर है। Sushma Swaraj देश की अकेली Female politician हैं, जिन्हें असाधारण सांसद पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। कोई उन्हें दीदी बुलाता था कोई उन्हें बड़ी बहन कहता था। आइये जानतें हैं सुषमा स्वराज का निजी व राजनीतिक सफर।

स्वर्गीय सुषमा स्वराज ने रचे कई इतिहास

  • हरियाणा सरकार में सबसे कम उम्र की कैबिनेट मंत्री बनीं।
  • दिल्ली की पहली महिला CM का रिकॉर्ड भी उनके नाम है।
  • भाजपा की पहली महिला कैबिनेट मंत्री बनीं।
  • अकेली महिला सांसद, जिन्हें आउटस्टैंडिंग पार्लियामैंटेरियन का पुरस्कार मिला।
  • मोदी सरकार में पहली पूर्णकालिक महिला विदेश मंत्री।
  • फिल्म जगत को उद्योग का दर्जा दिया। फिल्म उद्योग को भी बैंक से कर्ज मिलने का रास्ता खुला।
  • भाजपा की पहली महिला राष्ट्रीय मंत्री बनने का रिकॉर्ड।
  • हरियाणा में हिन्दी साहित्य सम्मेलन की चार वर्ष तक अध्यक्ष रहीं।
  • विदेश मंत्री रहने के दौरान Sushma Swaraj का नाम ट्विटर पर सबसे ज्यादा फॉलो की जाने वाली विदेश मंत्री के तौर पर लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज किया गया था। उनके निधन तक उनका ये रिकॉर्ड कायम रहा।
  • Sushma Swaraj को अटल-आडवाणी का भरपूर स्नेह मिला। इसके बाद मोदी-शाह की जोड़ी के भी बेहद करीब रहीं। एक समय था जब भाजपा में अटल बिहारी वायपेयी के बाद Sushma Swaraj और प्रमोद महाजन सबसे लोकप्रिय नेता थे।
  • सड़क से लेकर संसद तक उनकी गिनती डी (दिल्ली)- फोर में होती थी। उनके अलावा शेष तीन नाम प्रमोद महाजन, अरुण जेटली और वेंकैया नायडू थे।
  • Sushma Swaraj केवल भारतीयों के लिए ही नहीं, पाकिस्तानी और बहुत से विदेशियों के लिए मसीहा रहीं हैं। 11 अक्टूबर 2017 को पाकिस्तानी महिला नीलिमा गफ्पार का भारत में इलाज करने के लिए उन्होंने तत्काल वीजा जारी कराया था। नीलिमा के पति ने Sushma Swaraj से इसके लिए अनुरोध किया था।
  • गलती से Pakistan पहुंच गई मूक-बधिर युवती गीता की 10 वर्ष बाद Sushma Swaraj की वजह से ही भारत वापसी संभव हो सकी। 26 अक्टूबर 2015 को जब वह वापस लौटी तो Sushma Swaraj ने उसे भारत की बेटी कहा था। इतना ही नहीं उन्होंने गीता के माता-पिता की तलाश के लिए एक लाख रुपये का ईनाम भी घोषित किया था।
  • 2019 का Loksabha Election न लड़ने का फैसला लेने के बाद Sushma Swaraj ने एक माह की निर्धारित अवधि खत्म होने से पहले ही सरकारी आवास खाली कर दिया और जंतर-मंतर स्थित अपने निजी फ्लैट में शिफ्ट हो गईं थीं। ये उनके व्यक्ति का बहुत बड़ा उदाहरण है। Swaraj ने अपने राजनीतिक या निजी जीवन में कभी ऐसा काम नहीं किया जिससे उनके परिवार या पार्टी की साख पर कोई आंच आए।

 

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