मां दुर्गा के 9 स्वरूपों का क्या है अर्थ, पढ़े पूरी खबर

दुर्गा शक्ति की प्रतीक हैं, जो सभी प्रकार की बुरी शक्तियों और बुरे विचारों से हमारी रक्षा करती हैं। दुर्गा शक्ति की उपस्थिति में नकारात्मक विचार और ताकत के अस्तित्व मिट जाते हैं। देवी को एक शेर या बाघ पर सवार दिखाया जाता है। यह संकेत है साहस और वीरता का, जो दुर्गा शक्ति का मूल तत्व है। नवदुर्गा यानी दुर्गा शक्ति के नौ रूप। जब आप जीवन में बाधाओं या बौद्धिक अवरोधों का सामना करते हैं, तो देवी के नौ रूप की विशेषताओं के स्मरण मात्र से सहायता प्राप्त होती है। यह विशेष रूप से उन लोगों के लिए अधिक मददगार है, जो अपनी क्षमताओं पर संदेह करते हैं या फिर हमेशा चिंताग्रस्त रहते हैं। ऐसे लोग, जो ईष्र्या-द्वेष जैसे नकारात्मक भावों से भरे रहते हैं।

  1. शक्ति का प्रवाह हैं शैलपुत्री

देवी के नामों के उच्चारण से हमारी चेतना जाग्रत होती है और मन केंद्रित होकर निर्भय और शांत होता है। शक्ति का प्रवाह (शैलपुत्री) नवदुर्गा में पहली देवी हैं शैलपुत्री। शैल यानी पत्थर। इस रूप की आराधना से मन पत्थर के समान मजबूत होता है। इससे प्रतिबद्धता आती है।

  1. ब्रह्मचारिणी: जानें विस्तृत प्रकृति को

ब्रह्मचर्य से शक्ति आती है। ब्रह्म का अर्थ है-अनंत और चर्य का अर्थ है चलना। यहां ब्रह्मचर्य का अर्थ हुआ अनंत में चलना। स्वयं को मात्र शरीर नहीं मानना चाहिए। हम अपनी विस्तृत प्रकृति को जानें और स्वयं को एक प्रकाश पुंज मानें। संसार में आप कुछ इस तरह चलें जैसे कि आप ही ब्रह्मांड हों।

  1. चंद्रघंटा: विचारों और ध्वनियों की समग्रता


नवरात्रि के तीसरे दिन देवी चंद्रघंटा की आराधना की जाती है। यह देवी घंटे के आकार का चंद्रमा धारण करती हैं। चंद्रमा का संबंध बुद्धि से है और घंटा सतर्कता का प्रतीक है। घंटे की ध्वनि दिमाग को वास्तविकता में ले आती है। ध्वनि से नि:शब्दता, नि:शब्दता से ध्वनि और फिर ध्वनि से नि:शब्दता की ध्वनि जब मस्तिष्क तक आती है, तब अंतत: वह विलीन हो जाती है और नि:स्तब्ध हो जाती है। जिस प्रकार चंद्रमा घटता-बढ़ता है, उसी प्रकार मस्तिष्क भी अस्थिर रहता है।

  1. कुष्मांडा: ब्रह्मांड की सृजनात्मक शक्ति की प्रतीक

कुष्मांडा अर्थात कुम्हड़ा अर्थात सीताफल, जो शक्ति से भरपूर सब्जी है। एक सीताफल में अनेक बीज होते हैं, जिनसे और भी कई सीताफ ल उत्पन्न हो सकते हैं। यह ब्रह्मांड की सृजनात्मक शक्ति और शाश्वत प्रकृति का प्रतीक है। कुष्मांडा के रूप में देवी के भीतर समस्त सृजन समाया हुआ है। यह हमें उच्चतम प्राण प्रदान करती हैं, जो वृत्त के समान पूर्ण है।

  1. स्कंदमाता: ज्ञान और क्रियाशीलता का साथ

स्कंद या प्रभु सुब्रमण्यम की मां स्कंदमाता कहलाती हैं। गोद में बालक स्कंद को लिए माता को शेर पर सवार दर्शाया जाता है। इनका यह रूप साहस और करुणा का प्रतीक है। स्कंद अर्थात कुशल।

  1. कात्यायनी: अन्याय और अज्ञानता को मिटाने का संदेश

देवी मां का यह रूप देवताओं के क्रोध से उत्पन्न हुआ। सृष्टि में दिव्य और दानवी शक्तियां व्याप्त हैं। इसी तरह क्रोध भी सकारात्मक और नकारात्मक हो सकता है। क्रोध को अवगुण न मानें।

  1. कालरात्रि: ज्ञान और तटस्थता का संदेश

काल अर्थात समय। सृष्टि में घटित होने वाली सभी घटनाओं का साक्षी है समय। रात्रि अर्थात गहन विश्राम या पूर्ण विश्राम। तन, मन और आत्मा के स्तर पर आराम। बिना विश्राम पाए आप दीप्तिमान कैसे होंगे? कालरात्रि गहनतम विश्राम के उस स्तर का प्रतीक है, जिससे आप जोश पा सकें। ये देवी आपको ज्ञान और तटस्थता प्रदान करती हैं।

  1. महागौरी: परमानंद और मोक्ष प्रदाता

देवी के इस रूप में ज्ञान, गमन, प्राप्ति और मोक्ष का संदेश छिपा है। महागौरी हमें विवेक प्रदान करती हैं, जो जीवन सुधा समान है। निष्कपटता से शुद्धता प्रकट होती है। महागौरी प्रतिभा और निष्कपटता का मिश्रण हैं। ये परमानंद और मोक्ष प्रदान करती हैं।

  1. माता सिद्धिदात्री: सभी सिद्धियों की दाता

मां दुर्गा के नौवा स्वरूप माता सिद्धिदात्री का है। ये सभी प्रकार की सिद्धियों को देने वाली हैं। इनकी पूजा करने से व्यक्ति को सभी सिद्धियां प्राप्त हो जाती हैं। इस पूरे संसार में उसके लिए कुछ अप्राप्य नहीं होता है। उसमें इस ब्रह्मांड पर विजय प्राप्त कर लेने की क्षमता आ जाती है।

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