दक्षिण के प्रसिद्ध संत केशवानंद भारती जी नहीं रहे

दक्षिण के प्रसिद्ध संत केशवानंद भारती जी नहीं रहे..वह आज सुबह एडनीर स्थित शैव मठ में धरा धाम को त्याग कर गोलोक के लिए प्रस्थान कर गए…!

केशवानंद भारती जी की पहचान एक संवैधानिक लड़ाई लड़ने वाले के तौर पर होती रही है. साल 1973 में केशवानंद भारती VS केरल सरकार.. के बीच चले केस के फैसले ने उनकी पूरे भारत में अलग पहचान बना दी थी..

केरल की तत्कालीन सरकार ने भूमि सुधार मुहिम के तहत जमींदारों से तो जमीनें ली हैं, इस मठ की जमीन को भी सरकारी कह दिया. सरकार का तर्क था कि वो जमीनें लेकर आर्थिक गैर-बराबरी कम करने की कोशिश कर रही है. इस सरकारी फैसले को तब युवा संत और ऐडनीर के मठ प्रमुख केशवानंद भारती जी ने चुनौती दे दी…

स्वामी केशवानंद भारती ने केरल भूमि सुधार कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। जिस पर लंबी सुनवाई के बाद कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। जिसके मुताबिक संविधान की प्रस्तावना के मूल ढांचे को बदला नहीं जा सकता है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक इस केस की सुनवाई 68 दिनों तक चली थी, जिसमें 13 न्यायधीश शामिल थे। सुप्रीम कोर्ट में इसे अब तक की सबसे लंबी सुनवाई में से एक माना जाता है। इस केस के बाद से साफ हुआ था कि सरकार संविधान में तो परिवर्तन कर सकती है, लेकिन उसके मूल ढांचे में परिवर्तन का उसके पास कोई अधिकार नहीं है।

कासरगोड़ केरल का सबसे उत्तरी जिला है. पश्चिम में समुद्र और पूर्व में कर्नाटक से घिरे इस इलाके का सदियों पुराना एक शैव मठ है जो एडनीर में स्थित है. यह मठ नवीं सदी के महान संत और अद्वैत वेदांत दर्शन के प्रणेता आदिगुरु शंकराचार्य से जुड़ा हुआ है|

शंकराचार्य के चार शुरुआती शिष्यों में से एक तोतकाचार्य थे जिनकी परंपरा में यह मठ स्थापित हुआ था. यह ब्राह्मणों की तांत्रिक पद्धति का अनुसरण करने वाली स्मार्त्त भागवत परंपरा को मानता है.

इस मठ का इतिहास करीब 1,200 साल पुराना माना जाता है. यही कारण है कि केरल और कर्नाटक में इसका काफी सम्मान है. शंकराचार्य की क्षेत्रीय पीठ का दर्जा प्राप्त होने के चलते इस मठ के प्रमुख को ‘केरल के शंकराचार्य’ का दर्जा दिया जाता है|

एडनीर मठ न केवल अध्यात्म के क्षेत्र में बल्कि संस्कृति के अन्य क्षेत्रों जैसे नृत्य, कला, संगीत और समाज सेवा में भी यह काफी योगदान करता रहा है|

रिपोर्टर बीपी पाण्डेय

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