बर्रा की बहन की राखी खा गई खाकी,. पढ़े पूरी खबर

 

बहुत दिन से एक फिल्म का द्रश्य देख रहे थे हम कानपुर निवासी जिसमें संस्पेंस था आखिर दोषी कौन आखिर किसने एक नौनिहाल संजीत यादव को एक परिवार से जुदा किया क्या अब दोस्त पैसे के लियें अपने दोस्त को शिकार बनायेंगे कहते है एक दोस्त जीवन का सच्चा मार्गदर्शक होता है एक दोस्त के साथ ही हम सबकुछ साझा करते है उसे अपने सुख दुख का साथी मानते है पर जो संजीत यादव के साथ हुआ |

उससे तो पूरी मित्र जाति कलंकित हों गई बेशक इस मामले में पुलिस की कार्यशैली संदेह के घेरे में है पर अब हर दोस्त अपने दोस्त पर शक करेगा खैर मेरे ज़्यादा लिखने से दुनिया बदलने वाली नही पर उस बहन के बारे में सोचता हूं |

जिसकी राखी को अब उसके भाई की कलाई कभी नसीब नही होगी। बस एक सवाल जेहन में जरुर कौंधेगा आखिर संजीत का वास्तविक हत्यारा कौन पुलिस या उसके दोस्त?

रिपोर्टर सुरेश राठौर

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