भारत और चीन के बीच सीमा पर तनाव बढ़ा, पढ़े पूरी खबर

भारत और चीन के बीच सीमा पर तनाव और बढ़ता दिखाई दे रहा है। गलवन घाटी में पीछे हटने की प्रक्रिया के दौरान दोनों देशों के सैनिकों के बीच हिंंसक झड़प हुई। इसमें Indian Army का एक अफसर और 2 सैनिक शहीद हो गए। दोनों सेनाओं के मेजर जनरल तनाव को कम करने के लिए बातचीत कर रहे हैं। Indian Army ने इसकी जानकारी दी है।

सोमवार रात को दोनों सेनाओं के बीच हिंसक झड़प हुई। सेना ने एक बयान में कहा कि दोनों पक्षों के वरिष्ठ सैन्य अधिकारी वर्तमान में स्थिति को काबू में करने के लिए बैठक कर रहे हैं। इड़प में चीनी सैनिकों की भी मौत हुई है। 1975 के बाद पहली बार ऐसा हुआ है, जब दोनों सेनाओं की बीच झड़प हुई है और उसमें जवान हताहत हुए हैं। आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच कोई गोलीबारी नहीं हुई।

Defense Minister राजनाथ सिंह ने तीनों सेना प्रमुखों और विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर के साथ Chief Of Defense स्टाफ जनरल बिपिन रावत के साथ बैठक की। इस दौरान पूर्वी लद्दाख के हाल के घटनाक्रमों पर चर्चा की गई। चीन ने भारत पर सीमा पार करने और उसके सैनिकों पर हमला करने का आरोप लगाया है। रायटर्स ने जब चीन के विदेश मंत्रालय से दोनों सेनाओं के बीच झड़प को लेकर सवाल किया तो उसने भारत से एकतरफा कार्रवाई से बचने को कहा, ताकि समस्या और न बढ़े। चीन और भारतीय पक्ष ने सीमा पर बनी तनाव की स्थिति को काबू में करने और सीमा क्षेत्रों में शांति बनाए रखने के लिए बातचीत के माध्यम से द्विपक्षीय मुद्दों को हल करने पर सहमति जताई। ग्लोबल टाइम्स ने चीन के विदेश मंत्री के हवाले से जानकारी दी है।

चीन के सैन्य जमावड़े को लेकर विवाद सुलझाने के मद्देनजर दोनों देशों के बीच पूर्वी लद्दाख में ब्रिगेड कमांडर और बटालियन कमांडर स्तर की वार्ता चल रही है। सैन्य सूत्रों के अनुसार दोनों पक्षों के बीच लगातार कई दौर की वार्ता जारी रहने से कई और स्थानों पर दोनों देशों की सेनाएं सीमित रूप से पीछे हटी हैं। इसी दौरान दोनों देशों की सेनाओं के बीच हिंसक झड़प की खबर सामने आई है।

भारत और चीन के बीच पिछले महीने की शुरुआत से ही लद्दाख बॉर्डर के पास माहौल काफी तनावपूर्ण बना हुआ था। May महीने के शुरुआत में चीनी सैनिकों ने भारत द्वारा तय की गई एलएसी को पार कर लिया था। चीनी सैनिकों ने पेंगोंग झील, गलवान घाटी के पास आकर अपने तंबू गाढ़ लिए थे। खबरों के मुताबिक, यहां पर करीब 5 हजार सैनिकों को तैनात किया गया था, इसके अलावा सैन्य सामान भी इकट्ठा किया गया था।

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