उन्नाव

फ़ातिमा ज़हरा की शहादत पर हुई मजलिसे, अंजुमनों ने किया मातम

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उन्नावइस्लाम धर्म के प्रवर्तक हजरत मोहम्मद साहेब की इकलौती बेटी व कर्बला के प्यासे शहीद हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की मां जनाबे फातिमा ज़हेरा सल्वातुल्लाह अलैहा की शहादत पर 4 मजलिसो का आयोजन हुआ जिसमें मस्जिदे फूल शहीद किले में मजलिसों का आयोजन हुआ।

इसमें मुल्क के मशहूर उल्माए कराम मौलाना गुलज़ार जाफ़री, मौलाना जिनान असग़र, मौलाना नदीम असग़र, मौलाना नामदार अब्बास जैसी शख्सियतो ने मजलिस को ख़िताब किया। वहीं मौलाना गुलज़ार जाफ़री ने मसायाबी करते हुए “बकीं में कब्र है वीरान आपकी बीबी, हम इस वजह से परीशां हैं।

फातिमा ज़हेरा” पढ़ा तो उपस्तिथ जनसैलाब अपने आंसुओं को रोक नहीं सका। इस मौके पर मुस्लिम वर्ग के लोग पूरी तरह से गम में डूबे थे। सभी अधिकतर लोग काले लिबास पहने हुए थे तथा घरों में काले झंडे लगाकर लोग अपने गम का इज़हार कर हजरत मोहम्मद साहेब को नजराने अकीदत पेश कर रहे थे।

साथ ही शहजादी फातिमा पर पड़ी मुसीबतों को याद कर लोग रोते बिलखते देखे गए। इससे महसूस हो रहा था कि, आज का दिन यौमे आशूरा जैसा है। इस मौके पर मजलिस को खेताब करते हुए मौलाना मोहम्मद हुज्जत ने कहा कि, शहजादी फातिमा ने बच्चों की तरबियत का ऐसा नमूना पेश किया, जिसकी पूरी दुनिया में कोई दूसरी मिसाल नहीं मिलती।

दूसरी मजलिस को खेताब किया मौलाना जिनान असग़र ने और तीसरी चौथी मजलिस को ख़िताब किया मौलाना नदीम असग़र और मौलाना नामदार अब्बास ने खिताब करते हुए कहा कि सभी को अल्लाह को खुश करने के लिए हमेशा अच्छे कार्य करना चाहिए इंसानियत के साथ हमेशा सत्य रह पर चलना हमारे आइडियल के नाम व मांस मीन ने यही सिखाया है हमें उन्होंने कहा कि, महिलाएं शहजादी फातिमा के बताते हुए रास्ते पर चलें ताकि उनको अपनी ज़िन्दगी का मूल मकसद ज्ञात हो, और ग़लत रास्ते से अपने आप को जाने से बचा सकती हैं।

इस मौके पर इमामे जुमा मौलाना ज़ैग़म ज़ैदी, इमामे जमात मौलाना जव्वाद असकरी, मौलाना आबिद, और मौलाना साहिल आदि लोग के साथ अधिक संख्या में लोग मौजूद रहे।

रिपोर्टर मोहम्मद शाहरुख 

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