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समोसा-कचौड़ी के बाद बचे तेल से बनेगा ईंधन

कानपुर
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पूड़ी, कचौड़ी और समोसा को कई बार तलने के बाद खराब तेल को अब उपयोगी बनाने की ओर कदम बढ़ाए जा चुके हैं। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने 25 फीसद से अधिक टोटल पोलर कंपाउंड वाले तेल को अखाद्य करार दिया है। ऐसे में दुकानदारों को मशीन दी जाएगी ताकि बचे तेल की उपयोगिता जांच सके। इसके बाद अनुपयोगी की तेल की खरीद करके यूनिटें बायोडीजल तैयार करेंगी।

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Harcourt Butler Technical University में ‘Process Audit in Oil Seeds and Oil Processing Industries’ विषय पर हुए राष्ट्रीय सम्मेलन में Oil technology association of india के उपाध्यक्ष व प्राधिकरण के सदस्य डॉ. द्विजेंद्र माथुर ने बताया कि रोजाना 50 KG से ज्यादा तेल इस्तेमाल करने वाले दुकानदारों को रिकार्ड भी रखना होगा। तेलों की Manufacturing के दौरान अब स्मार्ट स्टीकर भी लगेगा। यह स्टीकर उस तेल के बायोडीजल यूनिट तक जाने तक लगा रहेगा।

एचबीटीयू के Head of oil technology department व सम्मेलन के अध्यक्ष प्रो. आरके त्रिवेदी ने बताया कि खाद्य तेल से बनने वाला बायोडीजल इको फ्रेंडली भी होगा। अभी बायोडीजल का उत्पादन कम होने के कारण महंगा भी पड़ता है। खराब हो चुके तेल से इसका निर्माण होने पर आम आदमी के बजट में फिट बैठ सकेगा।

खाद्य तेल जलने के बाद और खतरनाक हो जाता है। उसमें Aldehydes, ketones, polymers जैसे हानिकारक तत्व शामिल हो जाते हैं। पालीमर्स ऐसा तत्व है जो कार्बोहाइड्रेट के साथ मिलकर कैंसर की कोशिकाएं विकसित कर सकता है, जबकि फैटी एसिड हृदय के लिए घातक होता है। एक निजी कंपनी के एक्जीक्यूटिव वाइस प्रेसीडेंट राजीव अरोड़ा ने बताया कि देश में प्रति वर्ष 23.5 मिलियन मीट्रिक टन खाद्य तेल की खपत है, जबकि हम आठ मिलियन मीट्रिक टन ही उत्पादन करते हैं।

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