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रेलवे ने बड़े पैमाने पर शुरू की खर्चो में कटौती

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यात्री और माल Transportation में कमी और आय में गिरावट से परेशान Railway ने बड़े पैमाने पर खर्चो में कटौती का अभियान छेड़ा है। आमदनी बढ़ाने के लिए माल भाड़े व यात्री किराये में छूट की स्कीमें लागू करने के बाद अब अनावश्यक पदों को खत्म करने और गैर जरूरी खर्च में कटौती के प्रयास किए जा रहे हैं।

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इस संबंध में Railway Board की ओर से सभी महाप्रबंधकों को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश जारी किए गए हैं। वे अपने-अपने जोनों, इकाइयों में खर्चो में कटौती के लिए अभियान चलाएं। इसके लिए बोर्ड की ओर से बाकायदा लक्ष्य दिए गए हैं।

दुबारा सेवा में लिए गए सेवानिवृत्त कर्मचारियों को हटाना, समीक्षा कर फालतू अनुबंधों एवं खरीदारियों पर अंकुश लगाना, बिना टिकट यात्रा करने वालों के विरुद्ध अभियान छेड़ना, समस्त कैटरिंग कर्मियों को पीओएस मशीने उपलब्ध कराना, बिना बिल के भुगतान पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना, स्टोर के सभी आइटमों की समीक्षा करना, सभी डिपो का ऑडिट तथा ईधन के उपयोग में कमी लाना शामिल है। जोनो और डिवीजनों से कहा गया है कि वे अपने सभी खर्चो का नए सिरे से आकलन करें और गैरजरूरी खर्चो को काटने के बाद ही उन्हें बोर्ड भेजें।

यात्री और माल परिवहन में गिरावट का अंदाजा रेलवे को पहली तिमाही में ही हो गया था। जिसे थामने के लिए Railway Board ने सितंबर में ग्राहकों के लिए कुछ रियायतों का एलान किया था। इसके तहत माल ढुलाई पर बिजी सीजन सरचार्ज समाप्त कर दिया गया था। जबकि एसी चेयरकार तथा एक्जीक्यूटिव क्लास वाली ट्रेनों में खाली सीटें भरने के लिए किराये में 25 % छूट दे दी गई थी। लेकिन दूसरी तिमाही के आंकड़ों पर इसका कोई खास असर नहीं दिखाई देने से खर्चो में कटौती के अलावा रेलवे के सामने और कोई रास्ता नहीं बचा है।

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