उत्तर प्रदेश

निजी जूनियर हाईस्कूलों को अनुदान पर लेने और नए परिषदीय स्कूल खोलने पर रोक

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उत्तर प्रदेश सरकार ने बेसिक शिक्षा में सुधार के लिए अब निजी जूनियर हाईस्कूलों को अनुदान पर लेने और नए परिषदीय स्कूल खोलने पर रोक लगा दी है। इन स्कूलों में घटती छात्र संख्या और केंद्र से कम मिल रहे बजट के चलते यह फैसला किया गया है। इस बीच मौजूदा विद्यालयों में सुविधाएं और पठन-पाठन का माहौल सुधारने पर सरकार ध्यान केंद्रित करेगी। अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा रेणुका कुमार ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है।

शासन स्तर पर विचार-विमर्श के बाद पाया गया है कि छात्र संख्या के आधार पर शिक्षकों की तैनाती (समायोजन) की जाए। छात्रों की संख्या बढ़ाने के साथ छात्रों और शिक्षकों की नियमित उपस्थिति के साथ बेहतर पढ़ाई की व्यवस्था हो। बेसिक शिक्षा विभाग का मानना है कि नए स्कूलों को अनुदान पर लेने की बजाय पहले से चल रहे स्कूलों में आधारभूत सुविधाएं और शैक्षिक गुणवत्ता में सुधार लाई जाए। कोरोना काल में सरकार पर नया वित्तीय बोझ न बढ़े इसलिए नए निजी स्कूलों को अनुदान पर नहीं लिया जाएगा और न ही नए परिषदीय स्कूल खोले जाएंगे।

वित्तीय संकट
सरकारी प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों में शिक्षकों के वेतन मद का खर्च केंद्र व राज्य सरकारें मिलकर उठाती हैं। केंद्र सरकार द्वारा 2012 से नए परिषदीय स्कूल खोलने के लिए धन नहीं दिया जा रहा है। यूपी में 6 से 14 वर्ष के बच्चों को मुफ्त शिक्षा देने के लिए स्कूल खोलने का काम पूरा हो चुका है। केंद्र सरकार से यूपी को वर्ष 2015-16 का 2485.09 करोड़ और वर्ष 2016-17 का 3618.46 करोड़ नहीं मिला है। इस कारण राज्य सरकार को अपने स्रोतों शिक्षकों का वेतन देने के लिए 6103.55 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च करना पड़ रहा है।

सरकारी स्कूलों में बच्चे कम हुए
परिषदीय स्कूलों में 2011 के मुकाबले 2018-19 में छात्र नामांकन 23.62 लाख कम हुई है। मानक के अनुसार प्राइमरी में 30 बच्चों पर एक शिक्षक और उच्च प्राइमरी में 35 बच्चों पर एक शिक्षक का मानक है। मगर प्राइमरी में 29 बच्चों पर एक और उच्च प्राइमरी में 21 बच्चों पर एक शिक्षक है। मानक के अनुसार शिक्षकों की संख्या अधिक है।

सहायता प्राप्त स्कूलों में छात्र शिक्षक अनुपात:
प्रदेश में जूनियर सहायता प्राप्त स्कूलों की संख्या 3049 है। इनमें से 564 यानी 19 फीसदी स्कूलों में छात्रों संख्या 100 से कम है। 90 से 150 तक दाखिला लेने वाले स्कूलों की संख्या 818 है। प्रदेश के 17 सहायता प्राप्त स्कूलों में बच्चे हैं ही नहीं। चार स्कूलों में एक से 10 बच्चे हैं। 15 स्कूलों में 11 से 20 बच्चे हैं। इस प्रकार 1382 यानी 46 प्रतिशत स्कूल ऐसे हैं जिनकी छात्र संख्या 150 तक है। वर्ष 2011 -12 में सहायता प्राप्त स्कूलों में 702698 बच्चे थे जबकि वर्ष 2018-19 में यह तादाद 424250 रह गई। इससे साफ है कि सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूलों में भी छात्रों की संख्या काफी कम हुई है।

– कुल प्राइमरी स्कूल 113289
– कुल उच्च प्राइमरी स्कूल 45625
– कुल सहायता प्राप्त स्कूल 3049
– प्राइमरी स्कूलों में शिक्षक व शिक्षा मित्र 399272
– उच्च प्राइमरी में शिक्षक व अनुदेशक 164003

 

रिपोर्ट बीपी पांण्डेय

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